माँ सच्चियाय आराधना
(तर्ज -आने से उस के…)
मंदिर है भारत में, कई एक हजार,
मेरे मन आया, माँ तेरा दरबार,
सब से निराला है, माँ मंदिर तेरा,
दुनिया से न्यारा है, माँ मंदिर तेरा।।
स्वर्ग से भी सुन्दर, मुझे लगता यहां का नजारा,
है हवायें शीतल, और पानी ज्यूं अमृत की धारा,
मिट्टी के कण कण में, तेज ये तुम्हारा है, माँ मंदिर….।।
दिन उगे तो सूरज, इसे किरणों से अपनी सजाये,
सांझ जब ढले तो, चंदा मामा भी चाँदनी लुटाये,
तारों की टिम टिम में, लगना सुहाना है, माँ मंदिर..।।