आपणे भागां री
लय : हरी गुण गाय ले रे
आपणै भागां री, के कहणै री बात, स्वामीजी रो गण मिल्यो और तुलसी रो सिर हाथ।
आपणै भागां री… ॥ स्थायी ॥
एक-एक स्यूं दीपता रे ! हुआ जबर गणनाथ,
पर सगलां ने छेकगी रे भाई ! आ तुलसी री ख्यात ।
आपणै भागां री…
मुलकां-मुलकां में हुयो रे ! तेरापंथ प्रख्यात, कुण सो बो गणितज्ञ है, जो काढ सकै अनुपात। आपणे भागां री.. ॥२॥
घोर अंधारी रात में रे ! जो अवदान उदात, माजी ! थारै स्वप्न री आ, करामात साक्षात । आपणै भागां री.. ॥३॥
जननी अरु जनु-भूमि की रे ! राखी बात विख्यात, अवसर पर भूलै नहीं रे ! वो ही जात सुजात ! आपणै भागां री… ॥॥
जुग जुग जीवो जगत में रे! तपज्यो पुण्य-प्रताप, शुभाशीष सौ-सौ हृदय स्य, देवै चम्पक भ्रात। आपणै भागां री… ॥५ ॥