गुरु वन्दना
लय : ए मेरे दिले नादान
गुरुदेव दया करके, मुझको अपना लेना। मैं शरण पड़ा तेरी, चरणों मे जगह देना।
करुणा निधि नाम तेरा, करुणा दिखला जाओ,
सोये हुए भाग्यों को, हे ! नाथ जगा जाओ,
मेरी नाव भंवर डोले, इसे पार लगा देना ॥१ ॥
पापी हूं या कपटी हूं, जैसा भी हूं तेरा हूं,
घरबार छोड़ कर मैं जीवन से खेला हूं,
दुःख का मारा हूँ मैं, मेरे दुःखड़े मिटा देना ॥२ ॥
हे! अजर अमर स्वामी, तुम हो अन्तर्यामी,
मैं दीन-हीन चंचल, अभिमानी अज्ञानी,
तुमने जो नजर फेरी, मेरा कौन ठिकाना है ॥३ ॥
तुम सुख के सागर हो, निर्धन के सहारे हो,
इस तन में समाये हो, मुझे प्राणों से प्यारे हो,
नित माला जपू तेरी, नही दिल से भुला देना ॥४॥