Aarto

आरतो

चोवा चान्दण चान्दण गार घलाय, नीपो घर ओरा ओबरा जी ।
जठ मोत्यां को मोत्या को चौक पुराय, सींघासण घालो बेसणा जी ।
जठ बैठ सा (नाम)सा रा जोध, थे तो करो ओ भुवा बाई आरतो जी ।
म्हार आरतड़ म लीलोड़ा नारेल, रुपिया ओ पुरा ड़ोढ़स जी ।
बाईरी सासु बाई री सासु नणद पूछ बात, बवड़ क्या सुण घाल्यो आरतो जी ।
म्हार आरतड़म पीलोड़ी मोर पचास, रुपिया ओ पुरा डोढ़स जी ।
बबड़ झुठा बवड़ झुठा मती बोल, थांरो चार टका को आरतो जी ।
तो गढ़ दीलड़ी रा सजड़ किंवाड़, ऊंचा आया ओ ताला उघड़ जी । 
साय (नाम )रा भर्या रे भंडार, बालक बनड़ा ओ परण्या उघड़ जी ।
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