(लय : चेतन चिदानन्द चरणों में)
प्रभो तुम्हारे पावन पथ पर, जीवन अर्पण है सारा।
बढ़े चलें हम रुकें न क्षण भी, हो यह दृढ़ संकल्प हमारा ॥
१. प्राणों की परवाह नहीं है, प्रण को अटल निभायेंगे, नहीं अपेक्षा है औरों की, स्वयं लक्ष्य को पायेंगे।
एक तुम्हारे ही वचनों का,भगवन प्रतिपल सबल सहारा ॥
२. ज्यों-ज्यों चरण बढ़ेंगे आगे, स्वतः मार्ग बन जाएगा, हटना होगा उसे बीच से, जो बाधक बन आएगा।
रुक न सकेगी मुड़ न सकेगी, सत्य क्रान्ति की उज्ज्वल धारा ॥
३. आत्म शुद्धि का जहाँ प्रश्न है, सम्प्रदाय का मोह न हो, चाह न यश की और किसी से,और कोई भी विद्रोह न हो। स्वर्ण विघर्षण से ज्यों सत्य, निखरता संघर्षों के द्वारा ॥
४.
आग्रह हीन गहन चिन्तन का, द्वार हमेशा खुला रहे,
कण-कण में आदर्श तुम्हारा, पय-मिश्री ज्यों घुला रहे। जागे स्वयं जगाएं जग को हो यह सफल हमारा नारा ॥
५. नया मोड हो उसी दिशा में नयी चेतना फिर जागे
तोड़ गिरायें जीर्ण-शीर्ण, जो अंधरुढ़ियों के धागे
आगे बढ़ने का यह युग है, बढ़ना हमको सबसे प्यारा ॥
६. शुद्धाचार विचार भीति पर, हम अभिनव निर्माण करें, सिद्धान्तों को अटल निभाते निज पर का कल्याण करें। इसी भावना से भिक्षु का, ‘तुलसी’ चमका भाग्य सितारा