बतीसी1
बीरा झिरमीर जामण जाया झिरमीर बरसलो मेह ओ बीरा नानी सी बुन्द सवावणी जी
बीरा न्यूतो जामण जाया न्यूतो नाइकर हाथ ओ
बीरा वान तो न्यूतण धण गई जी
थान न्यूतो, थान न्यूतो (नाम )सा रा जोध ओ (नाम)जी पधारो म्हार मायर जी।
थान न्यूतो
थे
इस तरह पुरा परिवार का नाम लेणा) ***
2
बाबा रा बेटा बत्तीसी तो झेल बाई घर बिडद ऊंतावली जी
म्हार ए बाई दूकानां रो काम काका रो बेटो झेलसी जी, काका रा बेटा बत्तीसी तो झेल बाई घर बिड़द ऊंतावली जी
म्हार ए बाई आफीसा रो काम मामा रो बेटो झेलसी जी मामा रा बेटा बत्तीसी तो झेल बाई घर बिड़द ऊंतावली जी ।
म्हार ए बाई बजारां रो काम जामण रो जायो झेलसी जी । जामण जाया बत्तीसी तो झेल बाइ घर बिड़द ऊंतावली जी ।
म्हेतो ए बाई ऊभा जोवां बाट म्हारी वेन बत्तीसी ल्यायसी जी ।
बार ए बाई दमड़ा रो लोभ क घर घर न्यूतो थे दियो जी। थांर ए बाई पुतां रो गुमेज क घर घर न्यूतो थे दियो जी।
पूत्तज बीरा परमेश्वर रो माल क धण रो केरो गीरबो जी। गरबी रे बिरा कमधजीय र राज क नित चूड़ो नित चूनड़ी जी ।
मिल ल ए बाई बांवड़ली पसार जामण रौ जायो कद मिल जी ।
बायज बीरा पसारी क जाय क आ बांयज चूड़लो भर्यो जी ।
मिल ल ए बाई हिवड़ लगाय जामण रो जायो कद मिल जी ।
हिवड़ रे वीरा लगायो न जाय क ओ हिवड़ो हिरा जड्यो जी ।
मिल ल ए बाई शीश लगाय जामण रो जायो कद मिल जी ।
शीषज बीरा लगायो न जाय क ओ शीष चूनड़ भर्यो जी । ***
3
विरज नूतण धण गई कोई गुड़ की भेली हाथ म्हारा बीर बिजय सिंह होय थान न्युतुली आज
बाई आई शहर म विरोजी चौक र माय … म्हारा बीर. बाई आई चौंक म बिरोजी रसोयां र माय… म्हारा बीर बाई आई रसोयां बिरोजी महला र माय … म्हारा बीर टंगटंग महलां चढ़ गई भोजाई बीर बताय
वीरो बाई थारो घरां नही भतीजा खेल बार
भतीजा खेलो डोढ़स बीरा जी री होड न होय
टगटग महला उतरी कोई नैणा ढलक्यो नीर म्हारा बीर अंगूठो मोड़ जगाइयो थारी बेनड़ बिलखी जाय … म्हारा बीर डागलीय चढ़ हेलो मार्यो बेनड़ पाछी आय … म्हारा बीर कद रो बाई थारो मेल मॉड्यो कदरी चढ़ली बरात … म्हारा बीर आठ्यू रो म्हार मेल मॉड्यो नौमी री चढ़ली बरात … म्हारा बीर
तू क्यू बाई उणमणी थारो गैरो भरस्यां भात…. म्हारा बीर सुसरा जी तांई दुशाला, सासू जी र मेण्या से बेस म्हारा बीर..
दिवर जीठाण्या र पोमचा देवर जेठा र पिंचरंग पाग… नणद बाई न पोमचो नणदोयांन पिचरंग पाग म्हारा बीर भाणजा र मोलीयो भाणज्या रा भरज्यो भात म्हारा बीर मारूजी ताई पांच कपड़ा मोय सुगणी रो बेस म्हारा बीर..शहर के बजार म थारो गेरो भरस्यां भात म्हारा बीर
***बिरा भनावण का गीत 4
आज बिराजी बागाँ आया, माली बीर सरायो ए चालो ए म्हारी दिवर जीठाण्या बीर भनावां ए, बिरो म्हारो आयो रे।
नौ मन मिश्री घोल बिराजी न शर्बत पावो रे, बिरो म्हारो आयो रे। बिराजी रो रूप निरखतां चन्द्र छिपायो ऐ, बिरो म्हारो आयो रे ।
आज बिराजी पोल्यां आया, महाजन बिर सरायो ए
आज बिराजी चौक म आया, सुसराजी बिर सरायो ए आज बिराजी रसोयां आया, सासुजी बिर सरायो ए
चालो ए म्हारी संग री सहेल्यां बिर भनावां ए,
बिरो म्हारो आयो रे ।
आज बिराजी महलां आया, राजिन बिर सरायो रे चालो ए म्हारी चन्द्र गौरजा करो आरतो ए, बिरो थांरो आयो ए । नौ मण मीश्री घोल विराजी न शर्बत पावो ए, बिरो थांरो आयो ए ।
5
बिरा माथ न मेमंद ल्याय ज्यो बिरा काना न कुण्डल ल्याय ज्यो ।
म्हारी रखड़ी रतन जड़ाय, झुक ज्यायी रे फूल गुलाबरो बिरा सगला स्यूं पेली थान न्यूतीया, कंठोड लगाई इती बार, झुक.
बाई थारी भावज मांड्यो रुसणो, मनांवत लागी अती आर झुक.
बाई थारी भवज जायो हालरो, हुलरांवत लागी अती बार, झुक.
बाई थारी भावज माथो न्हाइयो, शीष गुंथांवत लागी अती बार, झुक.
(सभी गेणा का नाम लेणा)
***(तज : छुप गया कोई रे)
बीरो भात ल्यायो रे, बहना थारे प्यार से ।
जाकर के भन्दावो बहना, आदर सत्कार से ।।
कटुम्ब कबीला संग बीरो घर आयो जी ।
मायरा की पोटी भारी, संग मांही लायो जी
हिबडे लगाई बाई न, बिरो लाड प्यार से
सास ससुर को पहली, नेग चुकायो जी
जेठ जी का जोधपुर को, पोमचो बन्धायो जी
देवर जी न रोक रुपइयो, दिन्यो लाड प्यार से
चुन्दडी रो साफो बीरो, बहनोई क ल्यायो जी
गोटा वाली साड़ी बीरो बाई न ओढायो जी
माथे हाथ फेर्यो बाई क, बिरो लाड प्यार से
बिरो भात ल्यायो
जाकर कभन्दावा
जाकर केभन्दावो..
जाकर केभन्दावो….
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