Rishtedaro Par Geet (Susroji, Jeth, Devar, Jethuta, Nanda, Nandoi)

संक्रान्ती म नेग का गीत( सुसरोजी)

जीमो सुसराजी सीरो पुड़ी साग ऊपर घेवर छांटवां जी ।
सुसराजी चिणाव कमरा चार सासुजी ऊबा बरज छ जी ।
ईता राजिन्द दलाल मती होय दलाल हृया ना सर जी ।
घर अपण कंवरा रो ब्याव बाई न देणो दायजो जी ।
इती गोरी कंजूस ना होय कंजूसी कर्या ना सर जी ।
थोड़ो थोड़ो छोटी बंवा रो लाड लडायां बिना ना सर जी ।
(इसी तरह गेणा का नाम लेणा)
2
दिल्ली कमायो आगरो, जयपुर  में दुकान सुसराजी म्हान रखड़ी घड़ावो म्हारा राज
 सोनी को बेटों घर नहीं सोनो होय गयो तेज बवड़ ए थांक अबकी साल घड़ास्यां म्हारा राज 
काई थान सासुजी बरजीयो कांई थान उपज्यो ज्ञान सुसराजी म्हान सांची बात बतावो म्हारा राज 
नहीं थांरा सासुजी बरजीयो र मन स्यं उपज्यो ज्ञान बवड़ ए थांक अबकी साल घड़ास्यां म्हारा राज
 बोली का मिठा घणा र अक्कल में भरपर सुसराजी म्हान बात म बिलमायां म्हारा राज दिल्ली कमायो आगरो, शहर में दुकान सुसराजी म्हान कमरा चिणा‌द्यो म्हारा राज चेजार को बेटो घर नहिं सिमेन्ट हो गई तेज बवड़ ए थांक अबकी साल चिणास्यां म्हारा राज
(इसी तरह उपर वाले सभी नाम लेना)
***
3
सुसराजी तो पुछ बवड़ न क्या क्या चाहिये 
म्हार सुसराजी र हाथ री सोनरी रखड़ी चहीय 
सुसराजी घड़ाव सासुजी बैठ जड़ाव 
म्हारो छोटो सो देवरीयो भाभी न ल्याय पेराव
 धिन धिन रे देवर लाड़ला, भाभी रो मान बढ़ाव ।
(इसी तरह गेणा का नाम लेणा
4
सुसराजी म्हारा फूल गुलाब, सासुजी कली रे अनार की जी राज सुसराजी म्हान गजरा घड़ाय, गजरा म मोती पुवाय दयो जी राज सासुजी म्हारा बरज छ नाय, पेरल्यो बहु आपणी जी राज
घर की तो शोभा आपणी जी राज ।
(इसी तरह गहणों का नाम लेना) ***
जेठ 1
जेठ जी क महलां ऊपर बादली रे लाल ।
 झुक झुक झोला खाय रंगीली धण री बादली रे लाल । जेठजी तो केव गोरी धण गोरा घणा रे लाल । 
भाभी जी तो कोयल क रंग, रंगीली धण री…. 
जेठ जी तो केव गोरी धण चतर घणा रे लाल । 
भाभी जी तो घी म माखी मार, रंगीली धण री । 
जेठ जी तो केव गोरी धण डीगा घणा रे लाल
 भाभीजी हैं मोगरी क मान रंगीली धण…. 
जेठजी तो केव गोरी धण पतला घणा रे लाल ।
 भाभी जी हैं नौ घाणी रो ताल, रंगीली धण. ***
: जेठ :-2
जेठ सा म्हान चौवानी म चौवारो चीणाद‌यो, चौवानी म चौबारो चीणाद्‌द्योजी
म्हारी बच तो चौवानी पाछी ल्या‌यो ।
जैठ सा म्हार चौवानी म पच्चीस नया पैसा, म्हारा पच्चीसों पच्चीस पच्चासौं जी म्हारी बच तो चौवानी पाछी ल्या‌द्यो ।
जैठ सा म्हान चौवानी म फौरैन घुमा‌यो, चौवानी म फौरेन घुमाद्योजी
म्हारी बच तो चौवानी पाछी ल्याद्यो ।
जैठ सा म्हान चौवानी म हारज घडायो, (इसी तरह सभी गहना का नाम ले
 देवर :-1
काँच के कमर म चोपड खेल देवर भाभी। ओ हार गयो देवरीयो आ जीत गई भाभी ।।
केवो तो भाभी थान हार घडाय य ।
ओ ना हो देवर ना हो देवर नही दिल राजी ।। काँच क कमर मे
केवो तो भाभी थान साड़ी मंगाय देंय ।
ओ ना हो देवर ना हो देवर नहीं दिल राजी। काँच क कमर मे
केवो तो भाभी थान भाई सा बुलाय देव ।
ओ हा ओ देवर हा ओ देवर अब दिल राजी ।। काँच क कमर मे
***
देवर 2
देवर कन्दोई क जाय लाडु मोल लेव रे लाल ।
 कन्दोई मोटा मोटा सान्ध बालु रेत का रे लाल । 
माय धीरत मिलाय, बोद्या बलद को रे लाल । 
मांय इलायची मिलाय मोई माखीया रे लाल । 
मांय गुंद गीरी मिलाय मुरड्या कांकरा रे लाल ।
 मांय चीटकी घलाय, गोरी ठीकरी रे लाल ।
 देवर खाया सारी रात भोजायां देख लिया रे लाल ।
 देवर मन्दीर करस्यां बात, गली में भांडस्या रे लाल ।
***
3
म्हार-म्हार( नाम )जी देवर लाडला रे लाल ।
छीणग टांगो चमेली रो फूल हंस बोलो भाभी का देवर लाडला रे लाल ।
भावज चूनड़ का च्यारुं पल्ला चिकना रे लाल । 
ज्याम आव कलाकन्द की बास, 
हंस बोलो भाभी का देवर लाडला रे लाल ।
 देवर रात गया छा रंग महल में रे लाल । था
रा बिरोजी ल्याया छावां चार हंस बोलो, भाभी का देवर लाडला रे लाल । देवर दुपट्टा का च्यारुं पल्ला चिकना रे लाल ।
ज्याम आव सुगन्धी री बास हस बोलो, भाभी का देवर लाडला रे लाल ।
जेठुतो
के वो तो जेठुता थान पेचो रंगाययूं न
हीं चाची नहीं चाची टोपी भली छ 
चाची क नैणा स्यूं राज डर दरबार डर, 
थोड़ा चाचाजी डर थोड़ा म्हें भी डरां छां 
के वो तो जेठुता थान, अंगुठी घडायद्यां नहीं 
चाची नहीं चाची घड़ीया भली छ 
केवो तो जुठुता थान दुलड़ी घड़ाय द्यां नहीं चाची नहीं चाची सांकल भली छ 
केवो तो जेठुता थान सूट सीलाय द्यां नहीं चाची नहीं चाची, सफारी भली छ 
केवो तो जेठुता थान दोय परणाय द्यां 
नहीं चाची नहीं चाची एक भली छ । चाची क नैणा स्यूं राज डर दरबार डर, थोड़ा चाचाजी ड़र थोड़ा म्हे भी डरां छां । ***
नाणदो
म्हार लाग नाणदो, म्हार भंवरजी रो भाणजो म्हार बाईसा रा, जायोड़ा रे गीगला मं थांर मामी लागुरे बजारा में जांवता नाणदोजी मिलग्या २ म्हान फोरेन का क्रीम पावड़र दिलादरे नाणदा, मं धार मामी लागुरे पनवाड़ी र जांवता नाणदो जी मिलग्या २ म्हान मीठोड़ो तो पान खीलादरे नाणदा, में थांर मामी लागुं रे 
सुनारा क जांबता नाणदोजी मिलग्या २
म्हान मोतीड़ारो हार पुवाय दरे नागदा, में चार मामी लागु रे
हलवाई क जांवता नाणदो जी मिलग्या २ म्हान बिदामा री कतल्या खुवायद रे नाणदा, में थार मामी लांगु रे होजीयारी र जांवता नाणदो जी मिलग्या २ म्हान बढ़ीया सो सुट दिरायदरे नाणदा, में थांर मामी लागुं रे म्हार लाग नाणदो म्हार भंवरजी रो भाणजो, म्हार लाडली नणदरा जायोड़ा रे गीगला, म थार मामी लागु रे ।
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