बीरा :-
बीरा माहेरो भरण ने बेगो आय भाणजी रो ब्याह रच्यो । माथे में म्हारे टीका ल्याजो रखडी रतन जडाय
महारी नथली में हीरा जडाय भाणजी रो व्याह रच्यो । काना में बीरा झुमका ल्याजो रतन जडाय
म्हारे कुण्डल में हीरा जडाय भाण्जी रो ब्याह रच्यो ।॥ गले में म्हारे नेकलस ल्याजो
दुलडी उथल पोवाय म्हारे हंसली म हीरा जडाय भाणजी रो व्याह रच्यो ।
हाथा में बीरा बाजुबंद ल्यायो, चुडी रतन जडाय म्हारी अंगुठी री मौती लगाय, भाणजी रो व्याह रच्यौ ॥
पगल्या में बीरा पायल ल्यायो बिछिया उथल घडाय
म्हारी बिछिया में घुघरा लगाय, भाणजी रो ब्याह रच्यो ।। ओढण ने बीरा चुनड़ी ल्याज्यो जैपुर सु मोलाय म्हारी चूंदड़ी में सूरज चाँद जडा़य, भाणजी रो व्याह रच्यौं ।
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-: बीरा :-2
आनन्द छायो रे आआंगणिये म्हारे बीरो आयो रे, आनन्द छायो रे….हो
सोने रो सुरज उगियो चंदो जोत जलावे रे-२
नौलख तारा झिलमिल चमके हियो हुलसाव रे…आनन्द छायो रे… हो दादर मोर पपैया नाचे, कोयल बैन सुणावे रे- २
सगुन सजावे सोन चिडी, वीरों चुनड ओढावे रे,
बाई टीका काढ रे, आनन्द छायो रे…हो
वि
बिंदिया चमके कंगना खनके कुण्डल झोला खावे रे
छम छम बाजै बैजनिया मंगल गावे रे, आनन्द छायो रे….हो
आज तो बीरोजी भात ल्याया, सगला घणो दौर जिठाणी हंस के यूं बोली घणो राजनसरायो रे सुहायो रे
सासु नणद हंस के यूं केव घणो सुहायो रे, आनन्द छायो रे…. हो हरखे चुनड निरखे, बीर ने हंस बतलाव रे शुभ आशीषा दे दे बेनड, मान बढायो रे, आनन्द छायो रे…. हो