Bhagwan Tumhara Dhyan Dharu

भगवान तुम्हारा ध्यान धरूं
भगवान तुम्हारा ध्यान धरूं
महावीर तुम्हारा ध्यान धरूं
अन्तर-आत्मा का ज्ञान करूं
१. हर सांस गीत बने मेरा, हर चरण जीत बने मेरा । आनन्द सुधा का पान करूं, भगवान तुम्हारा ध्यान धरूं ।।
२. मिटे निराशा का घेरा, हो सदा प्रफुल्लित मन मेरा । समता सरिता में स्नान करूं, भगवान तुम्हारा ध्यान धरूं ।।
३. चाहे फूल खिले पथ में, हो तीखे शूल भले पथ में । संयम रथ पर प्रस्थान करूं, भगवान तुम्हारा ध्यान धरूं ।।
४. भार नहीं उपहार बने, यह जीवन सुख का द्वार बने । क्षण-क्षण का मैं सम्मान करूं, भगवान तुम्हारा ध्यान धरूं ।।
५. फल का आग्रह नहीं करूं, ‘राकेश’ सहज कर्त्तव्य करूं । आत्मिक बल का उत्थान करूं, भगवान तुम्हारा ध्यान धरूं ।।
लय : भगवान तुम्हारे चरणों में…
रचयिता : राकेश मुनि

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