Bhikshu Ko Bhulaye Kaise Bhikshu Nam Pyara Hai

(लय- : जनम स्यू कुंवारों……….)

भिक्ष को भूलाएं कैसे ? भिक्षु नाम प्यारा है। 
रात की अन्धेरी में वह, दीप सा उजारा है
॥ सत्य को पुकारा जिसने, ज्योती को बुलाया।
चेतना का चिन्मय दीपक, जिसने जलाया। 
आरती उतारै सौ सौ, वंदन हमारा है ॥
प्रण के लिए जो मरता, वही तो महान है। 
खुद के लिए जो बनता, वही तो विधान है।
बुझते चिराग चलते, तप से उबारा है ॥
तूफान लिखते जिनका, इतिहास हाथों से
 मिलती सचाई उनको, लड़ते जो रातों से।
 सुख तो मिलेगा सच्चा, संयम सहारा है ॥
निर्माण होता खुद से, तुमने बताया था।
कांटों के पथ पर चलना, तुमने सिखाया था। 
कैसी बहाई जग में, पुण्य मुक्ति धारा है ॥
सैनिक सभी हम गण के, पहरा लगायेंगे।
 प्राणों की देकर बाजी, सुयश फैलायेंगे।
 बढ़ते चलो सब आगे, तुलसी का नारा है ॥

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