Bhikshu Swami Antaryami

आपरो आसरो है

लय : मिलो न तुम तो
भिक्षु स्वामी! अन्तर्यामी! करद्यो बेड़ा पार । आपरो आसरो है, केन्द्र विश्वास रो है ॥
१. कालैजै री कोर म्हारै, मन में रम्यो है थांरो नाम ओ, सब कुछ अर्पण थारै, थे ही म्हांरा राम घनश्याम हो। पलक विछावां, दर्शण चावां, खोलो अन्तर द्वार ॥
२. गंगा में न्हाल्यो चाहे, काशी बणाल्यो अपणै धाम में, चौसठ तीरथ मिलग्या, म्हांनै तो सांवरिये रै नाम में। रिद्धि-सिद्धि, होवै वृद्धि, कल्पवृक्ष साकार ॥
३. ऊँचो है दर्शन थांरो, ऊँची है तेरापंथ री साधना, 
पूजा में फूल चन्दन, दीप नहीं है शुद्ध उपासना । 
शत-शत वन्दन दीपानन्दन, अभिनन्दन उपहार ॥
४. संयम री चाँदनी मे, चमचम चमकै थांरो संघ है,
 मेंहदी ज्यों रमग्यो म्हांरी, श्रद्धा में एक थांरो रंग है।
 नयो नजारो, दिव्य सितारो, तुलसी तारण-हार ॥

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