Pithi Jhol Ke Geet. (पीठी झोल का गीत)

पीठीका गीत १

मगर का मूंग मंगावो ए, म्हारी पीठी मगन करावो ए म्हारी पीठी मगन करावो ए, 
रायजादे र अंग लगाबो  म्हार जोशीको भल आयो ए, जोशी लिगन लिखाय र ल्यायो ए 
म्हार खातीको भल आयो ए, 
खाती बाजोटो घड़ ल्यायो ए म्हार कुम्हारयो भल आयो ए, कुम्हारयो कुम्भ कलश घड़ ल्यायो ए 
म्हार नाइको भल आयो ए, 
नाई हरी हरी डाली ल्यायो ए
 म्हार लवार्यो भल आयो ए, लवार्यो झबरक दिवलो ल्यायो ए
 म्हार तेलीको भल आयो ए, तेली तेल घड़ो भर ल्यायो रे दिवल र चोसठ बाटां ए, 
बनो पूछ बनी न बातां ए
 दिवल र चोसठ कलीया ए, 
बनो पूछ बनी री रलीया ए 
बनड़ क हाथ म डोरी ए, बनड़ स्यूं बनड़ी गोरी ए 
बनड़ क हाथ में कंची ए, बनड़े स्यूं बनड़ी ऊंची ए५.
अचल खलल म्हारी नदी ए बव, म्हारो बुगलो मुल मुल न्हायसी । बगलो बाय पसारी रायजादा, गेर बगत मती न्हाइजे । गेर बगत का सीया ए मरोला, दोफार मत न्हाओजी दोफार री ध्प पड़ेली, सांझ पंड्यां भल न्हाओजी । कणासा री रतन कचोली, कुणासार मोतीड़े से हारो जी साजनीयां री रतन कचोली, सायजी रे मोतीड़ा रो हारो जी दीनी छ म्हें रतन कचोली, बदल्यो छ मोतीड़ा रो हारी जी हार सोव म्हार हिवरे ऊपर, मोतीड़ा तपे रे लिलाड़ो जी । कुणासारे घ्रर्या रे नगारा, कुणासा रे बाजा वाजीया साजनीया रे घुर्या रे नगारा, समधीर बाजा बाजीया गेरा गेरा घुर्या रे नगारा, बीण कर बरनाटा जी
***
पीठी चढ़ाने की टाइम का गीत
मानीजता पूछ बालमीयां, थांरी चूनड़ चीकट क्यूं रेव रे, रायजाद र तेल चढ़ावन्तड़ा, बालक बनड़ र तेल चढ़ावन्तड़ा, म्हारी चुनड़ चीकट यूं रेव रे सुवा तेल फुलेल चम्पेल घणो, रायजादा र मन म कोड घणो ——– पूछ बालमीयां
(इसी तरह जो भी पीठी चढ़ाये उनके पती का नाम लेणा)
***
झोल डालने की टाइम का गीत
बाबोजी झोल झीकोल ए बडीयाजी मसल नवाव ए बापूजी झोल झीकोल ए माताजी मसल नवाव ए काकोजी झोल झीकोल ए काकीजी मसल नवाव ए बीरोजी झोल झीकोल ए मोजायां मसल नवाव ए (इसी तरह मामाजी मासाजी फूफाजी जीजाजी सभी का नाम लेणा
***२.
गेहूं ए चीणा रो ओबटणो राय चम्पेली रो तेल, रायजादी बैठी ओबटण आवो म्हारा दादो जी निरखल्यो आवो म्हारा बाबाजी निरखल्यो थां निरख्या सुख होय रायजादी बैठी ओवटण
(इस तरह, पापा, काका, बीरा सभीका नामलेणा
***
४.
सुण सुण रे बिकाणरा तेली, थारी घाणी तेल न चम्पेली माय घालु मरवो न मगतूरी, माय घालु केशर न कस्तूरी माय घालु जायफल न जांवतरी, ओ तेल नवल बनी र अंग चढ़सी दमड़ा बांरा दादोजी भर देसी, लेखो बांरी दादीजी कर लेसी (इस तरह बाबा, काका, बीरा, मामा का नाम लेणा)
***
५.
न्हायल लाडली न्हायल ओ, थांर पगल्यां र हेठ गंगा बेव जठ म्हारी बालक बनड़ी न्हायसी ओ, जठ सूरजजी बहू रेणादे पधारसी जठ म्हारी बड परवारी न्हायसी ओ, जठ गजानन्दजी बहु रिद्ध सिद्ध दे पधारसी सूरज जीर ओढ़ण पीली फामड़ी ओ, राणी रेणादे जतन घणा कर गजानन्दजी र ओढ़ण पीली फामड़ी ओ, राणी रिद्ध सिद्ध दे जतन घणा कर आवो देवता करो रे बधावणाजी, म्हार आज रो दिन रली आवणो न्हायल लाड़ली न्हायल ओ, थांर पगल्यां र हेठ गंगा बेव । जठ म्हारी दादाजी री प्यारी न्हायसी ओ, जठ महारा बाई- जवाई आयसी । आबो ए बायां करो रे बधावणा जी, म्हार आज रो दिन रली आवणो जवाया र ओढ़ण घर का गूदड़ा ओ, म्हारी बायां बेट्यां आरतो संजोय सी (इस तरह बाई-जंवाई का नाम लेणा)
***

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top