Mhari Haldi To Rang Surang

म्हारी हलदी रो रंग सुरंग निपज मालव, 

मुलाव लाडलड़ी रा दादोजी, 
दाद्यां र मन रल बारी दाद्यां र मन कोड, कोड घणा कर, हल्दी सीग चढ़ बनड़ी पीठड़ली दिन चार मुलमुल मसलल्यो, 
बनड़ी काजलियो दिन चार, नैण घुलायल्यो 
बनड़ी मेंदड़ली दिन चार, हाथ रचायल्यो 
बनड़ी चावलीया दिन चार, रुच रुच जीमल्यो 
बनड़ी न्हाय धोय बैठी बाजोट, सदा ए सवावणी लाड़ली कांई मांग गलहार, कांई दांत्यो चूड़लो 
म्है तो भल मांगु गल हार, भल दांत्यो चूड़लो 
म्है तो मांगु साजनीया रा जोध, बे म्हार सीग चढ़ 
बनड़ो न्हाय धोय बैठो बाजोट, सदा ए सवावणो लाडला काई मांगा सिर पाग, कांई सिर रो सेवरो 
म्हैं तो भल मांगु सिर पाग, भल सिर रो सेवरो 
म्हैं तो मांगा साजनीया री धीव, बा म्हार सीग चढ़
 बनड़ा तोरण तारांरी छांव, क्यूं कर बांधस्यो
 म्हार सिमरथ दादोजी साथ, भल भल बांधस्या
 बनड़ा बनड़ी हे इदक स्वरूप, क्यूं कर निरखस्यो
 म्हार गेणां रो डब्बो जी हाथ, भल भल निरखस्यां 
बनड़ा सासु हे इदक सरुप क्यूं कर भेंटस्यो
 म्हारी सासु न सात सिलाम भल भल भेंटस्या

२.
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