(लय : सूरज बादल में छिप जा रे)
चांदनी फीकी पड़ जावे, चमक तारां री उड़ जावे,
म्हारै महावीर र तेज सामने, सूरज शरमावे ॥चांदनी.. ॥
अन्तरा
त्रिशला थारां लाडलाजी सिद्धार्थ रा लाल,
वीरजी-२..
गर्भ आवताँ रत्न बरसिया, दुनिया हुई निहाल । चांदनी…..
ऐरावत चढ़ इन्द्र आविया, जन्म लेवता पाण, वीरजी-२.. पाण्डुशिला पर न्हावण करायो, शक्ति अलौकिक जाण ॥ चांदनी..॥
ओ संसार असार जाणकर, संयम लीनो धार वीरजी-२.. भरी जवानी दीक्षा लेकर, कियो धर्म प्रचार ॥ चांदनी.. ॥
केवलज्ञान उपावियोसजी, चार कर्म ने जीत, वीरजी-२.. समवशरण री शोभा भारी, सुर नर गावे गीत ॥ चांदनी.. ॥
कार्तिक बदी अमावस शुभ दिन मोक्ष पधारीया आप वीरजी-२..
दीया दीप दीवाली घर घर, अनूपम थांरी छाप ॥ चांदनी.. ॥