(लय : रुण झुन बाजे घुंघरा)
रूण झुन बाजे घुंघरा कोई झीणी बाजे ताल रे-२ सोने की असवारी मांही-२ आवे प्रभु महावीर रे ………..जीओ-३
अन्तरा ए तो सिद्धार्थ रा लाडला, ए तो तीन लोक रा नाथ रे, जैन धर्म रे उपदेशां ने=२ फैलाया प्रभु वीर रे… .जीओ-३ ॥१॥
थांरा दर्शन करवा आया, ऐ तो देव देवी नर नार रे,
प्रभुजी रो मुखड़ो चमक रहयो रै ज्युं पूनम रो चाँद रे……….जीओ-३ ॥२॥
थारी जय जय जग में, हो रही इण खुशियां रो नहीं पार रे, अर्हम मंडल घणा रे चाव सुं-२ गावे प्रभु रा गीत रे……….जीओ-३ ॥३॥