(तर्ज-देना है तो दीजिए…..)
देते हैं वो राम का कदम कदम पर साथ,
रहे उनके सिर पर हरदम, श्रीराम प्रभु का हाथ।।
जहां-जहां श्रीराम चलेंगे, वहां-वहां हनुमान जी,
जैसे जैसे राम कहेंगे, वो ही करें हनुमान जी,
प्रभु श्री राम की देखो, माने वो सारी बात ।।
श्री राम पर दुःख आये तो, दुःखी हुए हनुमान जी
जब तक संकट दूर ना होता, करते नहीं आराम जी,
एक पल भी चैन नहीं है, वो जागे सारी रात ।।
पूर्व जन्म का रिश्ता होगा, वरना राम कहां मिलते,
श्रीराम ने पुण्य किये, बरना हनुमान कहां मिलते,
अब जन्म-जन्म तक होगी, इन दोनों की मुलाकात।।
सेवक और मालिक दोनों में, प्रेम बड़ा ही गहरा है,
क्या बिगड़ेगा श्री राम का, हनुमान का पहरा है,
प्रभु राम से मांगे हरदम, “बनवारी” आशीर्बाद ।।