Ghodi
(तर्ज – पणीहारी …)
कठोड़ स्यू घोड़ी उतरी, ओ केशरिया ओ राज रंगभरिया ओ राज, कडे कियो श्रृंगार बनासा ।
उदीयापुर स्यू घोड़ी उतरी ओ केशरीया ओ राज,
विकाण में सज्यो सीणगार बनासा ।
ए कणजी घोड़ी मोलसी ओ केशरीया ओ राज,
ए कुण खर्चला दाम बनासा
दादाजी घोड़ी मोलसी ओ केशरीया ओ राज, बाबाजी खर्चला दाम बनासा
कणाजी रो पोतो घोड़ी चढ़ओ केशरीया ओ राज, रंग भरीया ओ राज कणाजी रो राय दोइत बनासा ।
दादाजी रो पोतो घोड़ी चढ़ओ केशरीया ओ राज, रंगभरीया ओ राजनानाजी रो राय दोइत बनासा ।
कुणाजी रो भतीजो घोड़ी चढ़ ओ केशरीया ओ राज, रंगभरीया ओ राज कुणाजी रो भंवर भाणेज बनासा ।
काकाजी रो भतीजो घोड़ी चढ़ओ केशरीया ओ राज, रगभरीया ओ राज मामाजी रो भंवर भाणेज बनासा । ए कुणजी घोड़ी बैठसी ओ केशरीया ओ राज ए कुण पकड़ लगाम बनासा । बनड़ो तो घोड़ी बैठसी ओ केशरीया ओ राज जीजाजी पकड़ लगाम बनासा ए कुणजी घोड़ी नीरखसी ओ केशरीया ओ राज …. ए कुण मंगल गाय बनासा फूफाजी घोडी नीरखसी ओ केशरीया ओ राज भूवाजी मंगल गाय बनासा बेनातो आरतो उतार बनासा
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Ghodi
(लय- फिरकी वाली तू कल फिर आना)
घोड़ी आई, चढ़लो मेरो भाई, जावेलो सुसराल रे
बना केवो थार मनड़ री बात रे
पहले मी तुने एक रोज ये कहा था, टीका लाने का तुमने वादा किया था
टीका लाना, बनी को पहनाना, तूं अपने गोरे हाथ से बना केवो थांर मनड़ री बात रे । इसी प्रकार अन्य गहनों का नाम लेना
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