Ghooghari(Namkaran)

घुघरी

सोन रूप चरु रे चढ़ाय रुपांरी ऊपर ढाकणी जी म्हारा राज ।
काठा गेहूं घुघरड़ी रंधाय, चीण रा ऊपर टोटला जी म्हारा राज ।
हर्या रे बांस रो छाबड़ीयो मगाय, दरीयायी ऊपर न्यातणो जी म्हारा राज ।
सुसरा जी रो नाइको बुलाय, म्हारी नगर बंटा‌द्यो घुघरी जी म्हार राज ।
बांटी रे नाइका, ऊल पेल बास, बाई घर मत देवो घुघरी जी म्हारा राज ।
बांटी रे नाइका उल पेल बास, बाई घर झाड्यो छाबड़ो जी म्हारा राज ।
आवो रे नाइका, बैठो म्हार पास, म्हारी किसविध बांटी घुघरी री जी म्हारा राज ।
बांटी ए जच्चा राणी ऊल पेल बास, बाई घर झाड्यो छाबड़ो जी म्हारा राज ।
सुती जच्चा राणी खुंटीजी ताण, हालरीय न गोदी ना लेव जी म्हारा राज ।
बाहर स्यूं पधार्या गोरी रा श्याम, म्हारी जच्चा सुत्या ना सर जी म्हारा राज ।
थांरो नाइको असल गीवार, म्हारी बाट गमाई घुघरी जी म्हारा राज ।
उठो ए जच्चा राणी होलर न हुलराय, थारी पाछी ल्यावां घुघरी जी म्हारा राज ।
चढ़ीया भंवरजी ढ़लतोड़ी रात, कोई दिनड़ो उगायो बाई र देश में जी म्हारा राज ।
आवो बिराजी बैठो हमार पास, थे किस विध आया पावणा जी म्हारा राज ।बारी ए भावज ओछ घर री धीव, बा पाछी मांग घुघरी जी म्हारा राज।
धीमा विराजी धीमा मधरा बोल, म्हरी दिवर जीठाण्या स सुण जी म्हारा राज।
आधी ए बाई थांरा टाबरीया झोलाय, म्हारी आधी दे यो घुघरी जी म्हारा राज।
टावर विराजी घेवरीया झोलाय, थारी सगली लेल्यो घुघरी जी म्हारा राज ।
सोने रुप चरु रे चढ़ाय, रुपारी ऊपर ढाकणी जी म्हारा राज ।
मोत्यां केरी घुघरडी रंधाय, लाला रा ऊपर टोकला जी म्हारा राज ।
हर्या रे बास रो छाबड़ीयो मंगाय, जरी को ऊपर न्यातणो जी म्हारा राज
लीनी बाई म्हारी ढोल धमाका साथ गीतेरण्या लीनी डोढस जी म्हारा राज ।
आई बाई पलस र माय, म्हारी भैस्या तोड्‌या पेकला जी म्हारा राज, म्हारी गायां तोड्या नेवड़ा जी म्हारा राज ।
आई बाई आंगणीया र माय म्हारा सुत्या टाबर ओझक्या जी म्हारा राज ।
आई बाई रसोया र मांय, म्हारा ढ़कीया बासण उघड्‌या जी म्हारा राज ।
आई बाई कमरा र माय भावजड़ी घरम घुस गई जी म्हारा राज ।
ओछा घरकी बाहर आय, थारी पाछी लेल्यो घुघरी जी म्हारा राज।
म्हारी ओ बाइजी दुःख छ आंख, आला में धर यो घूघरी जी म्हारा राज ।
आला ए भावज टाबरीया खोडाय, पल्ला म लेल्यो घुघरी जी म्हारा राज ।
लीनी ए भावज पल्लो ए पसार, कोई गज को काढ्‌यो घुघंटो जी म्हारा राज ।
थारी ए भावज दोय कोडी रो नाज, म्हारा रुपीया लाग्या डोढ़स जी म्हारा राज।
ने म्हे होती निर्धनीय घर नार, कठस्य् ल्याती घुघरी जी म्हारा राज ।
म्हें छा भावज से पुरुषा घर नार, थारी दूणी ल्याया घुघरी जी म्हारा राज।
बिरो म्हारो रावा बिचलो राव, भोजाई कटका कैजड़ी जी म्हारा राज ।
बिरो म्हारो सावणीया रो मेह, भोजाई आभा बिजली जी म्हारा राज।
आती ओ बिराजी राखीकी त्योहार, कोई कृण थार राखी बांधसी जी म्हारा राज।
म्हार ए बाई राठौड़ री रीत म्हरी साल्या राखी बांधसी जी म्हारा राज ।
जे थार बिराजी जनमलो पुत कोई कुण थार साध्या पूरसी जी म्हारा राज ।
म्हार ए बाई बड़ा ए घरा की रीत, म्हारी बेनड़ साथ्या पूर
 सी जी म्हारा राज।
 राजस्थान मे सुणी अनोखी रीत गीता म गाव घूघरी जी म्हारा राज ।
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