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कुवा पर गाने का गीत
समन्द तलांवा धण गई, माय मोरी सुख्या ए समन्द तलाव,
चकवो चकवी उड गया । बाग बगीचा धण गई,
माय मोरी सुख्या ए दाड़म दाख, चम्पोजी मरवो केवड़ो ।
हाट बजारा धण गई, माय मोरी सुत्या ए महाजन लोग, हाटयां रा ताला जड़ रया ।
राम रसोयां धण गई, माय मोरी जीम ए देवर जेठ, हाथ पकड़ आगी करी ।
रंग महल में धण गई, माय मोरी सुत्या ए सासुजी रा पुत मुख पर दूपट्टो मेलीयो ।
क्यू जाई ए मावड़ी, माय मोरी क्यूं जाईए किरतार, कुखड़ली बेरण हुई । कृणाजी आग विनती, माय मोरी कुण सुणलो पुकार,
कुखड़ली बेरण हुई । नौदस मास पुरा हूया,
माय मोरी जनम्यो ए लाड़ण पूत, कुखलड़ी सफल हुई । बेमाता आग विन्नती, माय मोरी राम सुणलो पुकार, कुखड़ली सफल हुई ।
समन्द तलावा धण गई माय मोरी भरीया ए समन्द तलाव, चकवो चकवी रम रया ।
बाग बगीचा धण गई, माय मोरी हरिया ए दाइम दाख, चम्पो जी मरवो केवडो ।
हाट बजारा धण गई माय मोरी बैठ्या ए महाजन लोग, हाट्या रा ताला खुल गया।
राम रसोया धण गई माय मोरी जिम ए देवर जेठ हाथ पकड़ नेडी करी ।
रंग महल में धण गई. माय मोरी सूता ए सासजी रा पूत दोय पग सामा बे दिया । भल जाई ए मावडी, माय मोरी भल जाई ए किरतार कुखडली सफल हई ।
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