(बाबा गुसांई जी महाराज की आरती)
खम्मा – खम्मा खंमाजी गुसांई तप धारीजी।
जुगड़ा में परचो भारी जीयो।
सब जन मिलकर हरकी करे आरती।
सब जन नाम उचारै जियो।
राजा बलि ने परचो दियो, तीन त्रिलोकी दिखायी जियो।
जुंजाला में परचो दिया मारा बाबाजी।
मरता री जान बचाई जीयो।
खम्मा-खम्मा …….
झाड़ी रे नेड़े आंवता म्हारा बाबाजी भूत पलीत घबरावे जीयो।
मन्दिर में दर्शन करीया पछे बाबाजी कष्ट पूरा मिट जावे जीयो।
खम्मा-खम्मा …….
आन्धा ने आँखिया दिरावे म्हारा बाबाजी, निपुत्रा ने पुत्र दिरावे जीयो।म्हारी अर्ज सुने है। म्हारा बाबाजी, शरणे आया री लाज राखे जीयो ।।
खम्मा-खम्मा
हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई सगला मिलकर आवे जीयो। दूर-दूर से आवे जातरु, गुसांईजी का दर्शन पावे जीयो ।।
खम्मा-खम्मा
गुसांईजी बाबा की करे जो आरती, नित उठ शिश जुकावे जियो। अन्न – धन लक्ष्मी सबको पावे, कभी ना कष्ट उठावे जीयो।
खम्मा-खम्मा
केवे स्व. श्री मुलनाथजी गुसांई रा नाम सबको भारी जीयो लेने से ही हितकारी जियो
अलख निरंजन