HarAayo HarAayo

हर आयो

हर आयो हर आयो, काशी जीरो बाशी आयो । 
घोड़ी चढ़ गोविन्द आयो, सासुजी न घणो सुहायो । 
हर लाडला तुं आयो, बाई  र मन भायो । 
हर लाडला तुं आयो, थारी मां न क्यूं नहीं ल्यायो । 
चन्दन री चौकी मंगावो, कंवरजी र हेठ लगावो । 
बोटी री डाली मंगावो कंवरजी स्यूं तोरण छुवावो ॥
 मामो जी न बेग बुलावो, बायरला फेरा दिरावो । 
फूलां री माला मंगावो, बाई स्यू बरमाला पेरावो ॥
 बाई रीमझीम करती आई नैण स्यूं नैण मिलाई । 
सासुजी न बेग बुलावो कंवरजी न पोख ले ज्यावो ॥ बांध्योड़ो दही मंगावो, कंवर जीर शीश लगावो । 
चांदीरो रुपीयो मंगावो, कंवर जीर शीश लगावो ॥ 
चांदीरो रुपीयो मंगावो, कंवरजी र शीश लगावो । 
जोशी जी न बेग बुलावो, बाई रो हथलेवो जुड़ावो ॥ थे आवो कंवरजी चंवरी, थान देस्या मधु कंवरी । 
आ म्हारी बाई, कंवरजी न घणी सुहाई ॥
 थे पियो म्हारो पाणी थांरी बोली अमृत वाणी । 
थे जीमो कंवरजी लपसी 
थांर संग म सदाशीव तपसी ॥ 
थे जीमो कंवरजी खाजा थारो बाप दिल्ली रो राजा । 
थे सीधी फेरी माला, जद मिलीया (नाम)जी साला ।
 थे साझ पड़ी रा ढुकीया, सब जानी आया भूखा ।
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