Jai Prabhuji Ki Jai Bolo

(तर्ज : छोटी सी मुलाकात प्यार बन………)
तन से करो सेवा, गुणगान करो रे 
मन से महावीर का गुणगान करो रे 
जय प्रभुजी की बोलो, जय जय जय-२
-: अन्तराः –
१. धर्म हे ये, सबसे बड़ा, 
भूल से भी ओरो का, दिल ना दुखा, 
सब है बराबर ये ज्ञान करो रे, 
मन से महावीर का गुणगान करो रे ॥
॥ जय प्रभुजी की…
२. झूठ ना बोलो कम न तोलो,
 अमृत के प्याले में विष ना घोलो, 
सब हे बराबर, ये ज्ञान करो रे, 
मन से महावीर का गुणगान करो रे ॥
॥ जय प्रभुजी की.
२. कोई भी तेरे दर पे आये, 
पथ में शांति का दीप जलाये, 
मानव जगत का सम्मान करो रे,
 सम्मान करके प्रभु का गुणगान करो रे,
॥ जय प्रभुजी की.

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