Mangalkari Nam Prabhu Ka

(लय : नैतिकता की सुरसिता में………..)
मंगलकारी नाम प्रभु का, तोड़े भव के बन्धन ।
 महावीर को वन्दन ॥ टेक ॥
त्रिशला मां का राजदुलारा, सिद्धारथ कुल प्यारा – २ वर्धमान से महावीर बन, जग में किया उजारा। 
कष्टों के कांटो में महका, जिसका जीवन उपवन ॥१ ॥
महावीर को वन्दन….
अभय, अहिंसा, अनेकान्त, अपरिग्रह धर्म हमारा – २ भय, हिंसा, अति संग्रह की, हम तोड़ गिरायें कारां।
 करें पराक्रम संयम में, आत्मा का पूजन अर्चन ॥२ ॥
महावीर को वन्दन…
ऊँचा-नीचा कौन जगत में, किससे प्रेम लड़ाई – २ 
हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई, सब हैं भाई-भाई। 
जाति-वर्ग से ऊपर हो, मानवता का सिंहासन ॥३ ॥
महावीर को वन्दन.
अपना दोष देखने वाला, महापुरुष कहलाता – २
 सुख-दुःख में सम रहने वाला, जीवन सफल बनाता । सोमलता निर्मलता का, बरसे मनभावन सावन ॥४॥
महावीर को वन्दन

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top