(तर्ज – जरा सामने तो आवो …)
जरा पेचा तो बान्धो मेरे बनड़ा, तेरे सहरे पे हीरा मोती लाल है
तुम सम्भल सम्भल कर चलना, कल जाना तुम्हें ससुराल है । पापाजी भी आये बराती सजाए, मम्मी मंगल मनाएबनड़ा
भाई तेरे बैण्ड बुलाए,
भाभी काजल लगाए बनड़ा
तुम घोड़ी पर बैठो मेरे बन्ना, इसमें शर्माने की क्या बात है, तुम सम्भल
जीजा तेरे सजधज आए, बहना आरती उतारे बनड़ा
जानी बाजे के साथ में नाचे, इसमें शर्माने की क्या बात है तुम सम्भ ल
आगे आगे घोड़ी चली है, पीछे जान चले बनड़ा सासू तेरी आरती उतारे,
ससूरजी तुझ को निहारे बनड़ा
बनड़ी माला लिए खड़ी है, मन ही मन मुस्काए वनड़ा बरमाला तो पहनो मेरे बन्ना,
इसमे घबराने की क्या बात है
तुम आए सगाजी के द्वारे वापस जाना बनी के साथ है
जरा पेचातो