जीवन छोटो सो
(तर्ज – कोरो कांजलियो……)
रचयिता : साध्वी अणिमाश्री
जीवन छोटो सो, तुं जाग अरे इंसान !
जीवन छोटो सो…..
१. के करणो के कर रह्यो, तूं करलै आज विचार ।
के लेकर आयो जग में, तूं के ले ज्यासी लार ।।
२. राग-रोष में क्यूं उलझ्यो, अब थांरी म्हारी छोड़।
बीत रह्यो यौवन थांरो, तूं अब तो मन नै मोड़।।
३. बीज जिसो ही फल हुवै, तूं रहजै बण हुशियार। * माया में मत राचजै आ है पाणी री धार।।
४. लाखीणो अवसर पायो, चेतनिया! अब तो जाग।
कर संयम री साधना तूं, दुर्व्यसना नै त्याग।।
५. ज्ञान, दीप, घट में जला, ओ हर देसी अंधार।
साचो शरणो धर्म रो, ओ करसी बेड़ो पार ।।