Jeevan O Do Din Ro

जीवन ओ दो दिन रो

(लय : होठों को छूलो तुम)
जीवन ओ दो दिन रो पाणी ज्यूं बह ज्यासी, लारै जस अपजस री, बस बातां रह ज्यासी ॥ध्रुव ॥
१. धन जोबन परिजन रो, संजोग सुरंग मिल्यो, ई तरुवर री डाली, तूं फूल विशेष खिल्यो, पण एक पून झटको, पटकी दे दहलासी ॥१ ॥
२. माटी री नगरी रा, नौ द्वार उघाड़ा है, खिण खिण खिर री भीतां, नित पड़रया धाड़ा है, मिटते ई मतलब स्यूं, कद तक मन बहलासी ॥२ ॥
३. पांचू कपड़ा थांरा, अणहुंतां मैल भर्ना, कादै में रगदोल्या, नहीं धोकर साफ कर्या, निज री निबलाई नै, के अब भी सहलासी ॥३ ॥
४. जद झोलो बाजैला, आ बगिया उजड़ैली, हंसो उढ़ ज्यावैला, पोलां सै उघड़ैली, थारै कानां कहसी, बो जग नै कह ज्यासी ॥४॥
५. गिणती री सांसां रो, जो लाभ कमावैला, अपणे ई जीवन नै, बो सफल बणावैला, ‘मुनि बुद्ध’ सदा जग में, जय झंडो फहरासी ॥५ ॥

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