डस गयो कालो रे कंवर रोहितास ने
डस गयो कालो रे कंवर रोहितास ने।
छाती भर आवे बेटा देख्या थांरी लाश ने ॥
१. फूल तोड़ने बेटा गयो रे तू बाग में।
डस गयो कालो बेटा गोरे गोरे हाथ में।
जुलम कियो रे बेटा-२ इस काले नाग ने ॥ छाती ।।
२. बोल तू बोल बेटा एक बार बोल रे माता थांरी रोवे बेटा अंखियां तू खोल रे।
छुप गयो चांद जैसे-२ अंधियारी रात में ॥ छाती ॥
३. लेकर लाश रानी शमशान आई।
अपने ही हाथों रानी चिता बनाई।
झर झर रोवे रानी-२ आंसू भरे आंख में ॥ छाती ॥ ४.
इतने में राजा हरिश्चन्द्र आये ।
पहले तो रानी मेरा कर्ज चुकाओ।
पीछे जलाना रानी-२ चिता और लाश ने ॥ छाती।
बोलत रानी सुन मेरे राजा। ५.
कुछ भी नहीं है कैसे सुधरेगा काजा ।
चिता को जला दे राजा-२ कंवर तेरे पास में ॥ छाती ॥
६. आधी साड़ी से रानी कफन बनाया।
आधी साड़ी से रानी कर्ज चुकाया।
कर्ज चुकाके रानी-२ फुंक रही लाश ने ॥ छाती ॥
७. फूलों की वर्षा गगन बीच बरसे।
एक पुत्र बिना जिया मेरा तरसे ।
कथन गायो तुलसी-२ ‘प्रभु मेरे पास में ‘ ॥ छाती ॥