Kantho Geet

कंथो
कंथो आयो मेड़त ए सैंया ल्यायो झाल भराय ऊतरीयो बड़ हेट 
मिठी न बोली रा बनड़ा रा दादाजी म्हे जांवा राज घरा जाओ जाओ कांई ए करो ए सैंया बैठो जाजम ढ़ाल जीमो चावल दाल, गुलाब जामुन की गोठ कराय देऊं जीम जुठ घर जाय आया था बनड़ा र कोडाया, जाओ ए गीत गवाय खाली हाथ मती जाओ ए लुगांयां थे नेग लेर घर जाया उपाली मती जाओ ए लुगाया मोटर कर पहुंचाय कथो आयो मेड़त ए सैंया आयो झाल भराय, ऊतरीयो बड़ हेट मिठीन बोलीरा दादीजी म्हे जावां राज घरां जाओ जाओ कांई ए करो सैंया बैठो म्हार पास बैठो जाजम ढ़ाल आया छ बनड़ र कोड़ाया थे जावो गीत गुवाय भुखी तो मती जाओ ए लुगायां घेवर देऊ छंटाया रसगुल्ला री गोठ कराय देऊं जीम जुठ घर जाय पाना केरा बिड़ला मंगायदेऊ चाबतड़ा घर जाय उपाली मती जावां ए लुगायां छतरी दे पहुंचाय । आया म्हे बनड़ा रे कारण चाल्या जी गीत गवाय । ***

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