Kanvar Kaleva Ka Geet

कंवर कलेवा का गीत

(तर्ज – सावन का महीना …)
पाटे ऊपर थाल सजायो, पुरस्या लाडु ठोर 
सासुकी साड़ी की बना, पकड लीनी कोर । 
कबर कलेवो ल्यावो, बना न बुलावो, 
पांच पकवान पूरस्या थाल सजावळ मुह फुलायो बनड़ो, नहीं जीम एक भी कोर … सासुकी …. बनासा न राजी करबा, सासु सुसरा आया
कांई चावो बनासा थे, क्यूं बिलमाया । 
बना थारें आगे, चलेना कोई जोर ।
 सांसूजी गाड़ी दिरावो म्हाने, अंगूठी दिरावो टीवी दिरावो म्हान, घडी़ दिरावो पल्लो नहीं छुटे, हो जाओ चाहे भोर ॥ सासुकी जो थे केवोला बना, 
थान म्हें दिरावां कोल कर्यो हां बना,
 नहीं म्हें बिसरावां रुचरुच भोजन जिमे बनासा,
 खावे लाडु ठोर ॥ सासुकी साडी की बना छोड़ दीनी कोर
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