Kanya Dan Aur Sindur Dete Samay Ka Geet

कन्या दान

बाई रा बाबोजी कर रया दान 
बडीयाजी बाईरा बरज रया 
बाई रा बापुजी कर रया दान 
मायड़ बाई री बरज रही 
मती बरजो ए घर री नार 
बाई ए म्हारी थोड़ा दिन री 
बाई न राख जीयां ही रे जाय बेटी बाबल री बाई न भेज जठ ही उड़ जाय चिड़ीया बागां री 
बाई न बान्ध जठ ही बन्ध जाय गयैन खुंटन की बाईरा काकाजी कर रया दान बाई रा बिराजी कर रया दान
(ऊपर की तरह पुरा नाम लेणा) ***
(सिन्दूर देने के समय)
दादाजीने दे दिया अनमोल धन रतना 
बाबाजी ने दे दिया अनमोल धन रतना जय जय (नाम)
जी बाई (नाम)की मांग भरना सिन्दूर भरने वाले सिन्दूर की लाज रखना । पापाजी ने दे दिया
(इसी तरह परिवार का नाम लेणा) ***

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