Kathe Su Aayi Sunth

कठे स्यूं आई सूंठ कठ स्यूं आयो जीरो 

कठ स्यूं आयो ए म्हारो मां को जायो बीरो 
दिल्ली स्यूं आई सूंठ, जैपुर स्यूं आयो जीरो 
बम्बइ स्यूं आयो ए म्हारो मां को जायो बीरो । 
आ क्या में चइय सूंठ ओर क्या मं चइय जीरो 
ओर क्याम चहीय ए थारो मां को जायो बीरो 
आ क्या म राखूं सूंठ और क्या में राखु जीरो 
और कठे उतारुं ए थांरो जामण जायो बीरो 
डब्बे मं राखु सूंठ शीशी म राखूं जीरो
 महलां म उतारो ए म्हारो मां को जायो बीरो

लाडु में चइय सुंठ, सागां म चइय जीरो 
ओर मायरो भरण न चइय म्हारो मां को जायो बीरो
आ ढुल गई सूंठ, बीखर गयो जीरो
ओ रुस गयो ए थारो मां को जायो बीरो
 उठाय लेस्यां सूंठ चुगाय लेस्यां जीरो
 मनाय लेस्यां ए म्हारो मां को जायो बीरो ।

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