Biro Mharo Aayo Bhawaj

(लय-म्हारा हथेल्या के बीच छाला)

बीरो म्हारो आयो, भावज बांटा जोव – २
मायड़ स्यूं ओ, मायड़ स्यूं मिलण की मन में आवा म्हारा मारुजी
रुंकड़ीयो बताद्यो म्हार पीर को, मारगियो बताद्यो म्हार पीरको
गोडा आई बाजरी चिड़ीयां चुग चुग जाव – २
तील्ली रो ओ तील्ली रो नीनाण करणों पड़सी म्हारी गोरी ए पीवरीये जावण रो हठ छोड़ द्यो, मायड़ स्यू मिलणरी जीद छोड़ द्यो ।
घेरदार घाघरो लम्पादार चूनड़ी – २
काचली ए, काचली कसुमल हीरां जडादयूं म्हारी गोरीए
मायड़ स्यू मिलबारो हठ छोड‌द्यो, पीवरीये जावण रो जीद छोड़‌द्यो 
ऊजली बत्तीसी मं तो घणा कोड स्यूं ल्याई – २
बीर न ओ बीर न देवण री मन में आव म्हारा मारुजी मारगीयो बताद्यो म्हार पीरको, रुकड़ीयो बता‌द्यो म्हार पीरको
राखी वाला फूंदा मतो घणा कोड स्यूं ल्याई, बीर र ओ बीर र बांधण री मन में आव म्हारा मारुजी मारगीयो बता‌द्यो म्हार पीरको, रुकड़ीयो बता‌द्यो म्हार पीरको
चांदी केरी छिन्नी मं, कुंकु चावल रखीया – २
बीर र ओ, तिलक काढ़ण की मन में आव म्हारा मारुजी
मारगीयो बता‌द्यो म्हार पीरको, रुकड़ीयो बता‌द्यो म्हार पीरको आज चोखो मोहरत गोरी पीवरीये सीधावो – २
गोग री ओ, गोग री नौम्यूं न लेबा आस्यां म्हारी गोरी ए
मारर्गियों बतायो थार पीर को, रुकड़ीयो बतायो थार पीरको ।
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