क्या लेकर तू आया जगत में
लय :- चाँदी की दीवार न तोड़ी
क्या लेकर तू आया जगत में, क्या लेकर तू जायेगा।
सोच समझ ले रे बन्दे, नहीं आखिर तू पछतायेगा ॥ स्थायी ॥
बचपन बीता इन गलियों में यौवन भी रंग रलियों में।
खूब सजाया तूने तन को, फूलों और कभी कलियों से देख बुढ़ापा क्यों घबराये यह तो इक दिन आयेगा..
सोच समझ ॥१॥
जीवन भर तो गद्दे तकिये, अन्त लकड़ियां सीढ़ी की। अपनी खुद की चिन्ता कर ले, छोड़ सातवीं पीढ़ी की
बाँध के मुट्ठी आया जगत में, हाथ पसारे जायेगा.. सोच समझ ॥२॥
भाई बन्धु कुटुम्ब कबीला, मरघट तक सब जाएंगे।
स्वार्थ के दो आंसू देकर, लौट-लौट घर आएंगे
कोई न आया संग किसी के, कोई न संग में जाएगा.. सोच समझ ॥३॥
स्वार्थ में यह अंधी दुनिया, सुख में साथ निभाती है
जब पड़ती दुःखों की छाया, छंमन्तर हो जाती है
तुलसी’ का तुम ध्यान धरो ये ही संग में जाएगा.. सोच समझ ॥४॥