क्या लेकर तू आया जगत में
(तर्ज : चाँद सी दीवार न तोड़ी……)
क्या लेकर तूं आया जगत में, क्या लेकर तूं जायेगा ।
सोच समझ ले रे बन्दे, नहीं आखिर तूं पछतायेगा ।।
बचपन बीता इन गलियों में, यौवन भी रंग रलियों में, खूब सजाया, तूने तन को, फूलों और कभी कलियों से ।
देख बुढ़ापा क्यों घबराये, यह तो एक दिन आयेगा ।।
जीवन भर तो गद्दे तकिये, अन्त लकड़ियाँ सीढ़ी की, अपनी खुद की चिन्ता कर ले, छोड़ सातवीं पीढ़ी की ।
बाँध के मुट्ठी आया जगत में, हाथ पसारे जायेगा ।।२।।
भाई बन्धु कुटुंब कबीला, मरघट तक सब जायेंगे, स्वार्थ के दो आँसू देकर, लौट-लौट घर आयेंगे ।
कोई न आया संग किसी के, कोई न संग में जायेगा ।।३।।
स्वार्थ की ये अंधी दुनिया, सुख में साथ निभाती है, जब पड़ती दुःखों की छाया, छू मन्तर हो जाती है।
विमल प्रभु का ध्यान धरो तुम, वो ही संग में जायेगा ।।४।।