लेल्यो शान्ति प्रभु रो नाम
लेल्यो शान्ति प्रभु रो नाम, जिनवर शांति-२ रो धाम । धोल्यो दिल रा पाप तमाम, बेगी मुक्ति मिलसी, हो बेगी.. ॥ ध्रुव ॥
१. नहीं है जीवन रो विश्वास, अचानक रुक जावे लो सांस । पूरी हुई न किणरी आश, मन की मन में रहसी, हो मन की.. ।।
२. बांधो मत कर्मा रो भार, सुनकर जिन वाणी रो सार। सुख रे लारै दुःख तैयार, समता राख्यां सरसी, हो समता.. ।।
३. कोई मत करज्यो परमाद, कर ल्यो सगरचक्री न याद। लेलो नरभव को सुख स्वाद, सूरज निश्चय ढलसी, हो सूरज.. ।।
४. छोड़ो सगला आर्त्तध्यान, करल्यो समता रो रसपान। जग में होनहार बलवान, टाली नहीं टलसी, हो टाली.. ॥
५. ढाल छापर पुर में गाई ‘कन्हैया’ मुनि री सीख सवाई। गावो तुलसी गुण हरसाई, जय जय बोलो तुलसी ॥ हो जय जय बोलो तुलसी