Lino Sharan Tere Charanan Ki

तर्ज:– (मैं तुलसी तेरे आंगन की)

लीनो शरण, तेरे चरणन् की
 चिन्ता चूरो, चिन्ता चूरो, चिन्ता चूरो मेरे मन की ॥ लीनी शरण ॥
हे प्रभु पार्श्वनाथ कृपालु, मेरी भी सुध लेना दयालु, प्यासी अंखियाँ दर्शन की ॥ १ ॥ लीनी शरण ॥
क्रूर कषायों ने मुझे घेरा, इनमें उलझा जीवन मेरा, काटो बेड़ी भव बन्धन की ॥ २ ॥ लीनी शरण ॥
भव-भव भटक्यो बहु दुःख पायो, जानें ना गति कर्मन अब तो प्रभु तेरे द्वारे आयो, की ॥ ३ ॥ ॥ लीनी शरण ॥
श्रद्धा में भक्ति रस घोले, “वीर मंडल” तो मिलकर बोले, जय-जय वामा नन्दन की ॥ ४ ॥ लीनी शरण ॥

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