(तर्ज:– तू ने मुझे बुलाया शेरावालिए)
हे शंखेश्वर पार्श्वनाथा, नाथा, तेरी जय जय कार, जय जय कार, जय जय कार, जय जय कार ।
शरणों लियो तुम्हारो प्रभु पार्श्वजी,
भव-सागर से तारो प्रभु पार्श्वजी, साँवलिया पाश्र्वजी, शंखेश्वरा पाश्र्वजी, नाकोड़ा पार्श्वजी ।
योगी कमठ को मान मिटायो,
जलते नाग को जोड़ो बचायो, पंच परमेष्ठी मंत्र सुनाकर, पंच परमेष्ठी मंत्र सुनाकर, उनको कियो उद्धारो प्रभु पार्श्वजो ॥ १ ।। भवसागर से ।।
जो भी आया शरण तिहारी, उसकी नैया तँने पार उतारी, मैं तेरे चरणों का चाकर, मैं तेरे चरणों का चाकर, अब तो नजर निहारो प्रभु पाश्र्वजी ॥ २ ॥ भवसागर से ॥
“वीर मंडल” पारस गुण गावे, नित भक्ति की ज्योत जगावे, मिट जाये अज्ञान अन्धेरो, मिट जाये अज्ञान अन्धेरो, ऐसो कर उजियारो प्रभु पार्श्वजी ॥ ३ ॥ भवसागर से ॥