(तर्ज : बाबुल का ये घर….)
मैय्या नवरात्रों में, जब धरती पे आती है, किस को क्या देना है, यह सोच के आती हैं ।।
पहले नवरात्रे में, माँ सबकी खबर लेती, दूजे नवरात्रे में, अपने खाते में लिख लेती, तीजे नवरात्रे में 2, बात आगे बढ़ाती है ।।
चोथे नवरात्रे में, माँ आसन लगाती है, पांचवे नवरात्रे में, माँ भोग लगाती है, छठे नवरात्रे में – 2, सब को दर्शन कराती है।।
सातवें नवरात्रे में, माँ खोलती खजाना है, आठवें नवरात्रे तक, माँ लग जाती लुटाने में, नवे नवरात्रे तक – 2, दोना हाथों से लुटाती है।।
दसवें दिन माता की, जब विदाई भी आती है, सारी धरती के लोगों की, आंखे भर-भर आती है, “भक्तो” फिर आऊंगी-2, वादा करके चली जाती है।।