Sanchal Nam Ki Jyoti Jagava

(तर्ज : सिरियारो री सन्त)

सांचल नाम की ज्योत जगावां, हिलमिल मां का मंगल गावां
थांरे मंगल कारी नाम से मां दुखड़ा भागे, म्हानै मां सांचल रो नाम प्यारो प्यारो लागे 2
दुष्ट दलन कर मैया थे तो, भक्ताने उबारा जी महिषासुर को मर्दन किन्यो मधुकेटव संहारा जी देवाा बोले है जयकारा, ऋषि मुनि ध्यान धरे है थांरा थांरी अदभुत लीला म्हाने प्यारी प्यारी लागे । म्हाने -2
तीन लोक में करे गर्जना, भूत पिशाच ना रूक पावे । नव दुर्गा की ज्योत भवानी अन्तर्मन मां हरषावे ।। सिंह सवारी थांरी प्यारी, खुले दर्शन की बलिहारी। जन जन के मनड़े मे मेरी मात् विराजे । म्हाने………
जब जब दानव होया जगत में, मां सांचल अवतार लियो । इन्द्रादिक सब देवा मिलकर माता को आहवान कियो ।। काली, करणी बनकर आया, भुवांल, सुसाणी, लक्ष्मी पाया दीन दुखी ने मां की मूरत प्यारी लागे । म्हाने …
मन्त्राक्षर सम नाम तिहारो, जाप जप्यां दुःख क्यं आवे । 2 जन्म जन्म की खुशियां, माता थारै चरणा में पावे माता कृपा भाव बरसावो, टाबरिया न गले लगावो दास चरण को ‘भक्तगण’ सेवा मांगे। म्हाने…..

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