मिल्यो मिनख अवतार (भजन)
लय : खड़ी नीम रै नीचे
मिल्यो मिनख अवतार, चेत तूं बावला। चौरासी स्यूं निकल बारणै, डग भर जरा उतावला ॥ स्थायी ॥
मोह माया में मुग्ध बण्यो, तूं काल अनन्तो बीतग्यो, भर्यो खजानो आज देखले, तर तर सारो रीतग्यो, रीतै रा कुण करसी जग में चावला ॥१ ॥
डगर अजाणी लोग अजाण्यां, मिल्यो अजाण्यो साथ है, च्यार दिनां री चटकच्यानणी, फेर अन्धेरी रात है, एक तराजू तूलसी गौरा सांवला ॥२ ॥
अकल बिना ही ऊंट उभाणा, तु विवेक स्यूं काम ले, मिनख बण्यां के हुवे ? ज्ञान की जोत हियै में थाम ले, खोल अन्तर आंख मिटा दे झांवला ॥३ ॥
टेढ़ो न्याय न चलसी जग में, सीधै स्यूं सुख पावैला, चलगत सुधऱ्यां पार हुवैला, बिगड्यां गोता खावैला, ‘बुद्ध’ एक ओली में रांक र रावला ॥४॥