-: ऊँ भिक्षु ऊं भिक्षु :-
(लय : छोटी-छोटी गैया..)
ॐ भिक्षु ऊँ भिक्षु ऊँ भिक्षु स्वाम।
श्रद्धा से हम करें प्रणाम – २
विघ्न हरण मंगलमय नाम ॥आं ॥
बल्लशाह दीपां के लाल,
पाकर प्रभु को हुये निहाल – २
कंटालिय सुखकारी ग्राम ॥१ ॥ श्रद्धा से हम…….
अंधेरी ओरी का प्रवास,
यक्ष-राज को मिला प्रकाश – २
तेरापंथी बने तमाम ॥२ ॥ श्रद्धा से हम…….
भिक्षु की अमृत वाणी,
सत्य धर्म की सहनाणी – २
सिद्ध वचन जिनका अभिराम ॥३ ॥ श्रद्धा से हम……..
शूलों में भी फूल खिले, अंधियारे में दीप जले – २ जाप करें हम सुबह और शाम ॥४ ॥ श्रद्धा से हम……..
पुण्य धरा से किया प्रयाण,
पाया तुमने अवधिज्ञान – २
सिरियारी अब तीरथ धाम ॥५ ॥ श्रद्धा से हम..
तेरे जप से शक्ति मिले. तेरे जप से शान्ति मिले – २ स्मरण करें हम आठ् याम ॥६ ॥ श्रद्धा से हम…….
पल-पल में तुम रहते साथ, सबके सिर पर तेरा हाथ- २ ‘सुमन’ सदा जय विजयी नाम ॥७ ॥ श्रद्धा से हम…