Om Jay Trishala Nandan

ॐ जय त्रिशलानन्दन !
ॐ जय त्रिशलानन्दन ! स्वामी जय त्रिशलानन्दन ! करुणा दृष्टि निहारो, तोड़ो भव बन्धन ।।
१. श्रद्धा विनय भक्ति से, तारो पार उतारो, हे ! करते हम वंदन । भव-दुःख भंजन ।।
२. जनमें सुद तेरस को, तुम क्षत्रियपुर में । छिम-छिम, छिम-छिम बाजी, झालर घर-घर में ।।
३. त्रिशला लाल दुलारे, ज्ञात वंश प्यारे । यौवन में संन्यासी, जय जग उजियारे ।।
४. विघ्न विनाशक स्वामी, भूत प्रेत हारी । संकट कष्ट कटे सब, तुम हो उपकारी ।।
५. ‘चण्डनाग’ का तुमने, बेड़ा पार ‘अर्जुनमाली’ जैसे नर को तार किया । दिया ।।
६. सत्य, अहिंसा, समता, तत्त्व दिया तुमने । शिव सुख वह पाएगा, धार लिया जिसने ।।
७. करें आरती तेरी, दिल दीपक द्वारा । मुख-मुख गूंज रहा है, वीर नाम प्यारा ।।
लय : आरती…..
रचयिता : साध्वी राजीमतीजी

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