(लय- जहां डाल डाल पर)
धरती के बन गए देवता
धरती के बन गए देवता, क्या गुण गरिमा गाएं । हम भक्ति थाल सजाएं, श्रद्धा से शीष झुकाएं ।।
१. जो आया महावीर शरण में, उसके संकट कट गए, पाकर तेरी ज्ञान ज्योति को, भ्रम के बादल फट गए ।
मन के दीप जले लाखों के, जीवन-दर्शन पाएं ।।
२. जनम जनम से आँख बिछाए, बैठ राह में तेरी,
सुधि के दीप जलाए हमने, मिट जाए भव फेरी । डगमगती नैया को भगवन् ! अब तो पार लगाएं ।।
३. धन वैभव सत्ता से कोई, ऊँच नीच नहीं होता,
अपने ही कृत कर्मों द्वारा, मानव हंसता रोता ।
संयम के दर्पण में अपना, अंतर रूप सजाएं ।।
४. महावीर ने साफ सुनाया, अपना कौन पराया, फिर झूठे इन सपनों में, मन को कैसे भरमाया ।
तव मम की दीवार तोड़कर, आगे कदम बढ़ाए ।।
५. मोर बुलाता ज्यों सावन को, धरती चाँद बुलाती, प्यासी ये हर सांस तुम्हारे, जीवन गीत सुनाती ।
महावीर निर्वाण महोत्सव, आओ आज मनाएं ।।
रचयिता : साध्वी राजीमतीजी