(लय : जगाया तुमको कितनी बार)
प्रभो ! यह तेरापंथ महान।
मिला, मिलेगा जिससे सबको आध्यात्मिक अवदान ।
प्रभो! यह तेरापंथ महान ॥
१. अर्हत्-वाड्मय का उद्गाता,
जीवन-दर्शन का व्याख्याता,
मानव संस्कृति का निर्माता ।
जिसके कण-कण में मुखरित है,
शाश्वत का संगान ॥
२. अभिनव धर्म-नीति निर्णायक,
सबल संगठन-सूत्र विधायक,
श्रम सेवा समता संगायक।
जिसने जग में सदा बढ़ाया,
मानवता का मान ॥
३. अनुशासन का उदाहरण है,
द्रुतगति से बढ़ रहा चरण है,
असहायों का सहज शरण है।
युग आस्था का सरल संस्करण,
प्रगति-शिखर सोपान ॥
४. बलिदानों की अमर कहानी,
पौरुष की जीवंत निशानी,
संघर्षों में हार न मानी।
आर्य भिक्षु का त्याग-तपोमय,
‘तुलसी’ अनुसंधान ॥