समरूं समरूं रे पारस देव ने
(लय : जन्मया-2 रे मीराबाई मेड़ते)
समरूं समरूं रे पारस देव ने
कांई समरयां संकट जाय, वामा सुत प्यारो रे
वासि वासि रे काशी देस रा
कांई वाराणसी रो वास वामा सुत प्यारो रे
कुल रो दिवलो रे, कंवर अश्वसेन रो
कांई है त्रिभुवन रो ताज, वामा सुत प्यारो रे
तार्या-2 रे, नाग-रू-नागणी
कांई फरमायो नवकार, वामा सुत प्यारो रे
सेवक सेवक रे साचा आपरा
कांई पद्मावती धरणेन्द्र,
वामा सुत प्यारो रे
त्यागी त्यागी रे, राणी प्रभावती
कांई त्याग्यो राज भण्डार, वामा सुत प्यारो रे …………
बजावे-२ रे जसरी बंसुरीया, बजावे-२ रे, गुणरा गुंघरीया
कांई कीरत रो कठताल, वामा सुत प्यारो रे ………
उतारूं उतारूं रे प्रभु थांरी आरती
कांई वारी जाऊंवार हजार, वामा सुत प्यारो रे
भजन बणायो रे, नाकोड़ा तीर्थ में
गावे गावे रे, भगत थांरा गीतड़ला
कांई गावे गावे गुणगान, वामा सुत प्यारा रे
कांई गावे गावे मुनि ‘गुणगान’ वामा सुत प्यारा रे …