वामानंदन शत-शत वंदन
लय : मिलो न तुम तो…
वामावंदन! शत-शत वंदन, श्रद्धा के आधार ।
आपकी शरण मिली, जीवन ज्योत जली //
१. नाम तुम्हारा पारस, पावन बनाता तेरा जाप है,
शीतल तुम्हारी आभा, हरती हर दिल का संताप है। शक्तिदाता, भाग्यविधाता, तुम हो तारणहार ॥
आपकी शरण……
२. आस्था के दीपों से, अर्चना तुम्हारी करते भक्त हैं, भक्ति के फूलों में, सौरभ महके हर वक्त हैं।
रोम-रोम में गीत गूंजते करते मधु झंकार ॥
आपकी शरण.
३. सागर गुणोंके भगवन ! तेरे गुणों का आर न पार है, जीवन निखारूं मेरा, भर दो गुणों का भंडार है॥
कामधेनु तू, कल्पवृक्ष तू, मनवांछित दातार है ॥
आपकी शरण…….
४. तू ही सहारा मेरा, तू ही किनारा मेरा है सही,
मंजिल तुम ही मेरी, मार्ग है तू विभु एक ही।
तेरे सम मैं भी बन जाऊ, स्वप्न बने साकार ॥
आपकी शरण….