Savriya Swamiji Aao Aangne

(लय : पणिहारी). 
सांवरिया स्वामीजी ! आओ आंगणै हो, 
ध्याऊं थांरो एक ध्यान। अंतर मन रा भगवान, 
देव उतारुं थांरी आरती हो भिक्खु स्याम ॥ स्थायी
सुधरी री छतरया गावै प्रीत स्यूं हो, 
थांरी वीरता रा गीत दृढ़ संकल्प रा संगीत, 
पहलो प्रवास शमशान हो ॥१ ॥
अंधेरी ओरी में हुयो च्यानणो हो, 
चसग्या ज्ञान रा दिया हरषित जन जन रा हिया, 
आगे बढ़ायो अभियान हो ॥२॥
भोगी ही कठिनायाँ स्वामी आकरी हो, 
पूरो मिलतो नहीं आहार तपता सरिता चर में जाय, चाख्या तपस्या रा पकवान हो ॥३॥
छाती में धमूका ठोला शीष में हो, 
तीखी गाल्यां रा बै तीर सह्या हंस हंस कर बो वीर, 
शंकर बण्यो है कर विषपान हो ॥४॥
चमक्यो है थांरी साची साधनां स्यू, 
सूरज सो ओ तेरापंथ आलोकित नभ धरा दिगन्त, 
अमर बण्यो है कर बलिदान हो ॥५ ॥
संकट टले है फले कामना हो, मन्त्राक्षर सो थांरो नाम सरज्या मनवांछित सै काम, पाया महाप्रज्ञ सा पुण्य निधान हो ॥६ //
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