सेवरा 1
पनवाडंया रा लाम्बा तीखा पान गुंथ ल्यायी म्हारी मालण सेवरो जी
सेवरड़ा तो बांध म्हारो बनड़ो, हठ लाग्यो जी
परणीज् तो साजनिया की धीव क, नहीं तो अखन कंवारड़ी जी
काई म्हारा बनड़ा आयो रे जंजाल क, कांई थान सपनो आइयो जी
नही म्हारी बनड़ी आयो रे जंजाल क, नहीं म्हान सपनो आइयो जी बिकानेर के बीचल बजार, रायजादी गुड़ीया खेलती जी ।
चालतड़ी री निरखूं बांरी चाल, अणीयाली आंख्या चित गयी जी ।
पनवाड्या रा लाम्बा तीखा पान, गुंथ ल्यायी म्हारी मालण सेवरो जी
सेवरड़ो तो बांध म्हारी बनड़ी, हठ लागी जी
परणीजू तो साजनीया रा जोध क, नहीं तो अखन कंवारड़ी जी
काई म्हारी बनड़ी आयो रे जंजाल क, कांई थान सपनो आइयो जी
नहीं म्हारा बनड़ा आयो रे जंजाल क, नहीं म्हान सपनो आइयो जी
देख्या देख्या बीच बजार, रायजादो दड़ीया खेलतो जी चालतड़ा री निरखूं वांरी चाल, अणीयाली आंख्या चीत्त गयो जी
सेवरा 2
(तर्ज – ये दो दिवाने दिलके)
बना ने बांधा सेहरा चमक रहा चेहरा,
चले हैं चले हैं चले हैं ससुराल ।
दादाजी का प्यार देखो लाये हैं सेहरा,
बाबाजी का प्यार देखो लाये हैं सेहरा
बना ने आज देखों हंस हंसके पहना
दादाजी खड़े मुस्काये,
दादीजी मंगल गाये,
चले हैं चले हैं- चले हैं ससुराल ।
(इस तरह परीवारका नाम लेना)
सेहरा 3
दादाजी बीणो, बाबाजी बिणो, चम्पेली रो फूल ओ, रायजादा रो जोगो सेवरो जी ।
पापाजी बीणो, काकाजी बीणो, चम्पेली रो फूल ओ, रायजादा रो जोगो
गुथ ल्यायी म्हारी मालण रंग रंगीलो, छैल छबीलो,
बीच लगाय ल्यायी हरी जरी ।
गुजा पर गुंजा लाग रहया है, आव सुगन्धी बासड़ली । बागां में मीठा आम जमेरी औरज मीठी दाखड़ल्यां । सेजा म मीठा लाडु पेड़ा और बनासा री बातडल्यां । रायजाद न सोव सैंया सेवरो ।
विराजी बीणो मामाजी विणो चम्पेली रो फूल ओ, रायजादा र जोगो फुफाजी, विणो, जिजाजी बीणो चम्पेली रो फूल ओ रायजादा र जोगो सेवरो जी –
(वापस पुरा नाम ऊपर की तरह लेना है)
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सेहरा4
स्टेशन का बाबु टीकट कटाद्यो बैठ्या रेल मं ।
बना कहां रे गया था अब तक नहीं आया रंग महल म । बनी बाग गया था मालण नही गुंथ्यो रंग रो सेवरो ।
गुंथ ल्यायी म्हारी मालण बिच में लगाय ल्यायी फुल गुलाब रो ।
म्हार घरां ताकीदी, बनड़ी उडीक रंग महल मं ।