1 सुहाग
बनड़ी सुहाग मांगण चाली अपर, दादाजी र दरवार, लाडली सवाग मांगण चाली अपर बाबा र दरबार, दादाजी देओ नी सुहाग, बाबाजी देवो नी सुहाग
आली भोली न सुहाग, अखन कंवारी न सुहाग,
पीवर पुरी न सुहाग, ए मां मै क्या जाणु
कामण ऐसा गुण ल लाग्या लाग्या
ओ राइबर, लाग्या लाग्या ओ सुरजमल,
इंदली बीदंली स गुण लाग्या,
मेण मजीट स गुण लाग्या,
काजल टीकी स गुण लाग्या,
छल्ला बींटी स गुण लाग्या, में
दी मोली स गुण लाग्या,
बनी थांरो बनड़ो है नादान,
दड़ीयां खेल लो चोगान,
पासा राल लो मैदान, गोखां बैठ्यो चाब पान,
तोरण आयो कर सलाम,
ए मा मैं क्या जाणु कामण एसा गुण लाग्या
इस प्रकार काका, भैया, मामा सभी का नाम लेना।
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2 सुहाग
चन्दा र चन्दाण बनी माथो न्हायो, सूरज किरण गुंथांयो ओ राज कामणीया माय खिनाई म्हान रंगी चंगी, सासुजी खीनाई रंग महला ओ राज कामणीया सांझ पड़ी दिन थण लाग्यो, मूरख मूंड़ नहीं बोल ओ राज कामणीया पौ फाटी दिन ऊग्ण लाग्यो, सहेल्यां बातां पूछ ओ राज कामणीया काई रे खुवायो थान काई रे पिलायो, थांरी क्यां स्यूं खोल भराई ओ राज कामणीया आंक खुवाया अकडोडीया चबाया, म्हारी मींगणया स्यूं खोल भराई ओ राज कामणीया माय बुरी म्हारो बाप बुरो, म्हारो सगो बुरो बेनोई ओ राज कामणीया जामण जायो बीर बुरो, म्हान मूरख न परणाई ओ राज कामणीया । डागलिया चढ़ हेलो मार्यो, कोई मती जणो लुगाई ओ राज कामणीया चन्दा र चन्दाण बनी माथो न्हायो, सूरज किरण गुंथायो ओ राज कामणीया । माय खिनाई म्हान रंगी चंगी, सासुजी खिनाई रंग महलां ओ राज कामणीया सांझ पड़ी दिन आंथण लाग्यो, चतर मूंड बोल ओ राज कामणीया पौ फाटी दिन ऊगण लाग्यो, सहेल्यां बातां पूछ ओ राज कामणीया काई रे खुवायो थान कांई रे पिलायो, थांरी क्यांस्यूं गोद भराई ओ राज कामणीया लाडु रे खुवाया म्हान पेड़ा रे खुवाया, म्हारी मोरा स्यू गोद भराई ओ राज कामणीया माय भली म्हारो बाप भलो, म्हारो सगो भलो बेनोई ओ राज कामणीया । जामण जायो बीर भलो, म्हान चतर न परणाई ओ राज कामणीया । डागलीय चढ़ हेलो मार्यो, सब कोई जणो लुगाई ओ राज कामणीया
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