श्री गणेश आराधना
(तर्ज – देख तेरे इंसान की हालत…)
सूंड सुंडाला ढूंद ढूंदाला, मस्तक मोटा कान, गणपति देव बड़ा बलवान,
करता हूँ गुणगान मैं तेरा, देना मुझ को ज्ञान,
गणपति देव बड़ा बलवान ।।
जो गणपति को प्रथम मनाता,
उसका सारा दुःख मिट जाता,
रिद्धि-सिद्धि सुख संपति पाता,
भव से बेड़ा पार लगाता, मेरी नैय्या पार करो प्रभु, तेरा लगाऊं ध्यान ।।
पार्वती जी के पुत्र हो प्यारे, सारे जग के तुम रखवारे. भोलानाथ हैं पिता तुम्हारे, सूर्य चन्द्रमा मस्तक धारे,
मेरा सारा दुःख मिट जाए, देना यही वरदान।।
रिद्धि सिद्धि तेरे संग सोहे,
मुषक सवारी मन को मोहे,
तेरी दया जिस पर हो जाए,
उसका सारा दुःख मिट जाए, माला जपूं
तेरी गणपति करता रहूँ गुणगान ।।
अन्न धन में प्रभु बरकत तुम हो,
विद्या में तुम बड़े निपुण हो,
प्रथम सभी में तुम ही बने हो,
नाम गजानन्द पा ही गए हो,
“भक्त मंडल” करे तेरी सेवा, देव दया के निधान